दुनिया आज भी तीन हिस्सों में बंटी हुई है। एक हिस्सा वह है जो शांति से जीना चाहता है और दूसरो को शांति से जीते हुये देखना चाहता है . दूसरा हिस्सा वह है जो अपने लिए तो शांति चाहता है किन्तु दूसरो के लिए नहीं। तीसरा हिस्सा वह है जो ना स्वयम शांति से जीना चाहता है और ना दूसरो को शांति से जीते हुये देखना चाहता है। स्वाभाविक भी है तीनों रोटियों के स्वाद भी अलग ही होने थे।
शनिवार, 26 मई, 2007
गुरुवार, 24 मई, 2007
तीन हिस्से
ईश्वर ने तीन रोटियां सेकीं। दुनिया तीन हिस्सों में बंट गयी। आदमी ने धरती ही नहीं बांटी आकाश भी बाँट लिया। एक हिस्से ने अपने झंडे में सूरज सजा लिया। दूसरे ने तारों को अपना लिया। तीसरे हिस्से ने चांद को झंडे पर जगह दी। आप क्या सोचते हैं?
बुधवार, 23 मई, 2007
rotian
ईश्वर ने तीन रोटियां सेकीं। पहली कच्ची रह गई, tatha दूसरी जल गई, ईश्वर ने तीसरी रोटी संभल कर सेकी। वह ना कच्ची रही, ना जली। पहली रोटी yuropians थे, दुसरी रोटी affricans थे, तीसरी रोटी हिंदुस्तानी थे।
गोरा हट जा
आप के बीच हम ले कर आने वाले हैं कुछ ऎसी बातें जो इतिहास के पन्नो से कभी-कभार ही सामने आ पाती हैं...
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